जीवन में सुख और दुःख !!

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या सचमुच एक दुखद घटना हैं। अपने career  की बुलंदियों को छूने वाले सुशांत को अपने जीवन को लेकर ऐसा निर्णय लेना पड़ा तो निश्चित ही वो किसी गम्भीर अवसाद से गुजर  रहे होंगे। किंतु इन सबके बावजूद भी उनका ये निर्णय चौका देने वाला है, वो भी तब जबकि उनकी पिछली ही फ़िल्म  छिछोरे जीवन में संघर्ष को लेकर संदेश दे रही थी।

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Sanitizers के ठाठ

बारह साल पहले :-

बात उन दिनों की है जब हम एक इंडियन MNC में कार्यरत थे. हम, और हमारे colleague राहुल और फार्रुख खान DMRC की एक साईट पर किसी काम से गए थे. हम सब में सबसे ज्यादा updated और हाई फाई खान साहब ही रहते थे, तो हुआ यूँ की लंच का समय हुआ, हम सबने वहीं जून की गर्मी में साईट पर ही अपना अपना टिफिन निकाला. लेकिन पानी की बोतल सिर्फ मेरे पास ही थी, सो हमने और राहुल नें उसी बोतल से थोडा थोडा पानी लेकर जल्दी जल्दी नाम के लिए हाथ धो लिए. क्योकिं गर्मी थी और पीने के लिए भी पानी चाहिए था. और मेरी उस बोतल के तीन हिस्सेदार थे, साले अपनी बोतल साथ लेकर नहीं चल सकते थे.

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Antarman – A Hindi Novel

अंतर्मन रजनीश चतुर्वेदी द्वारा लिखा गया हिंदी का एक नया उपन्यास है। ये कहानी है एक ऐसे सेल्समैन अर्जुन की जो अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। अपने जीवन के उतार चढ़ाव से परेशान अर्जुन अपने आपको निराशावादी और हताश विचारों के बीच असफलता की बेड़ियों में फँसा हुआ पाता है। ऐसे में अर्जुन को दरकार होती है एक ऐसी मदद की जो उसे इन बेड़ियों को तोड़ने में सहायता कर सके।

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कौन हैं राधा – और कृष्ण से उनका क्या सम्बन्ध है ?

सभी मित्रों को जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनयें !!

Radha Krishna

जहाँ हाल में सभी हिन्दू त्योहारों को येन केन प्रकारेण किसी ना किसी प्रकार निशाना बनाया जाता रहा है ,वहीँ पूरा प्रयास कियाजाता है की अपने ही त्योहारों , देवी देवताओं को लेकर हिन्दू लज्जित अनुभव करें | इसी कड़ी में भगवान् कृष्ण और जन्माष्टमी का पवित्र त्यौहार भी बौद्धिक आतंकवादियों के निशाने पे आ गया है | नहीं मै माननीयों द्वारा मटकी की उचाई निर्धारित करने की बात नहीं कर रहा हूँ, मै PETA द्वारा जारी किये गए उस फतवे की बात भी नहीं कर रहा हूँ जिसमे उनने गाय का दूध ना निकलने की हास्यापद बात कही है | दरअसल बुद्धिजीवियों का आतंक और जाल एक ऐसे वृक्ष की तरह फैला है जो जितना भूमि के ऊपर दिखता है उससे कहीं अधिक वह भूमि के नीचे अदृश्य रूप में है | और धीरे धीरे इनके बौद्धिक स्लीपर सेल्स मीडिया में, बॉलीवुड में , शिक्षण संस्थाओं में अच्छी जगह स्थापित होकर भारतीय संस्कृति और भारतीयता की जड़ें खोद रहे हैं | [Read more…]

विदाई – हिंदी कविता

जानता हूँ कि ये दिन लौट के ना आयेंगे दुबारा |

जब साथ छूट चुकेगा, इस जगह से हमारा ||

जानता हूँ कि ये प्यारे साथी कल बिछड़ जायेंगे |

अपनी ही दुनिया में सब अलग अलग बिखर जायेंगे ||

जाता हूँ कि कल मेरी अपनी ही अलग एक राह होगी |

जहाँ शायद ही किसी को किसी की परवाह होगी || [Read more…]