विदाई – हिंदी कविता

जानता हूँ कि ये दिन लौट के ना आयेंगे दुबारा |

जब साथ छूट चुकेगा, इस जगह से हमारा ||

जानता हूँ कि ये प्यारे साथी कल बिछड़ जायेंगे |

अपनी ही दुनिया में सब अलग अलग बिखर जायेंगे ||

जाता हूँ कि कल मेरी अपनी ही अलग एक राह होगी |

जहाँ शायद ही किसी को किसी की परवाह होगी ||

फिर भी ना जाने क्यों, यहाँ से जाने का मन कर रहा है |

शायद रिश्तों में नज़दीकियाँ बढाने से मन दर रहा है ||

डरता हूँ कि कहीं इतना अधिक प्यार ना उमड़ आये |

कि कल यहाँ से अलग होने पर दिल घबराए ||

मुझे जल्दी से यहाँ से वापस ले चल हे ईश्वर |

जाते समय कदम ठिठक ना जाएँ, बाद यही है एक डर ||

दिल में यादें तो ,आँखों में सपने भी तो हज़ार होंगे |

इन परायों में बिछड़ने वाले कुछ अपने भी तो हज़ार होंगे ||

यहाँ का अपनत्व, यहाँ के स्नेह से पार पाना होगा |

निश्चय है मेरा बस , अब तो घर वापिस जाना होगा ||

                                   रजनीश चतुर्वेदी 

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