असफल होने का एक कारण – कहीं आप लक्ष्य से भटक तो नहीं गए हैं

जीवन मै कई बार ऐसे अवसर भी आते हैं, जब हमें लगता है की हमारा प्रत्येक कार्य निष्फल जा रहा है, और हमें हमारी लगन एवं परिश्रम का कोई परिणाम नहीं मिल रहा है, सफलता एक कदम तक तो हमारा साथ देती है, किन्तु उसके बाद अचानक ना जाने क्या होता है, कि हमारे जीवन का विजय रथ एकदम से रुक सा जाता है | ऐसे में लोग और भी अधिक ध्यान भटकाने का प्रयत्न करते हैं, और कहते हैं, कि शायद किसी की नज़र लग गयी है | और वे हमें इससे बचने के अनेकों उपाय भी बताते हैं | वास्तव में आजकर बहुत से लोगो का रोज़गार , व्यापार ही ऐसे उत्पादों के बाज़ार से चल रहा है जो बुरी नज़र से बचने में सहायता करते हैं , विषम परिस्थितियों से बचने में सहायक सिद्ध होते हैं| और आप वो सारे प्रयास करने के बाद भी , समझ नहीं पाते हैं – की लक्ष्य से थोडा ही दूर कैसे रह गए हम | ऐसे में आपको सिर्फ और सिर्फ एक ही प्रश्न का उत्तर बचा सकता है – कहीं लक्ष्य से भटक तो नहीं गए हैं हम ? [Read more…]

तुम ही सच हो माता – जय माँ वैष्णो देवी

तुम ही सच हो माता, बाकि दुनिया झूठी |

जग रूठा मुझसे , पर तुम कभी ना रूठी ||

 

ऐसे ही कुछ भाव लेकर जब एक भक्त माता वैष्णो देवी के दरबार में जाता है, तो कहीं भी कोई भी शंका नहीं रह जाती, की माता उसकी प्रार्थना नहीं सुनेंगी | vaishno deviत्रिकुट पर्वत पर स्थित , कटरा के पास माता का यह दरबार सदियों से उनके अनन्य भक्तों की आस्था का केंद्र रहा है | एक समय था, जब माता तक पहुँचने की यात्रा अत्यंत ही दुर्गम थी, किन्तु जैसे जैसे समाया बीतता गया, माता के ही भक्तों ने इस मार्ग को अधिक  से अधिक सुगम बना दिया | आज ना केवल माता का दरबार, बल्कि कटरा में भी प्रत्येक वर्ष, दिन के बारह मॉस , भक्तों का ताँता लगा रहता है | इसमें कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी , अगर यह कहा जाये कि कटरा तथा उसके पास के सभी गाँवो का रोजगार एवं अर्थव्यवस्था माँ कि वजह से ही चल रही है |

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सफलता की कुंजी – अपनी इच्छा शक्ति बढ़ाएं

यदि मै आपसे कहूँ कि मेरे पास एक ऐसी सफलता की कुंजी है जो, आपकी किस्मत के सभी ताले खोलने की क्षमता रखती है, तो आप एक पल के लिए शायद हतप्रभ रह जायेंगे | किन्तु अच्छी खबर यह है की यह सच है |मैंने अपने पिछले लेख में सफलता के तीन बिन्दुओं के बारे में बताया था, जिनमे से एक इच्छा शक्ति थी| यह इच्छा शक्ति ही है, जो आपकी कार्य शैली का निर्णय करती है | आप अपने लक्ष्य के प्रति उतना ही अधिक आक्रामक रूप से अग्रसर हो सकते हैं, जितनी कि उसे पाने की आपकी इच्छा होगी | आपका मन आपको अनेक प्रकार की लालसाओं में उलझायेगा, आपको अनेक प्रकार के प्रलोभन देगा, और फिर एक ऐसा क्षण आएगा, जब आप अपने लक्ष्य के प्रति उतना अधिक आक्रामक नहीं रह जायेंगे, अपनी ही योजना को कार्यान्वित करने के लिए आप अपने पहला कदम ही नहीं उठा पाएंगे | याद रखिये आपका मन आपका शत्रु तथा मित्र दोनों ही हो सकता है, जरुरत है , तो बस उसे नियंत्रित करने की. यदि आपने अपने मन को काबू में कर लिया तो आवश्यकता अनुसार, उसकी अनंत शक्ति का भरपूर सहयोग ले पाएंगे | आपकी इच्छा शक्ति भी तभी प्रबल हो पाएगी, जब आप अपने मन के अनुसार नहीं, बल्कि आपका मन आपके अनुसार चलेगा | ऐसा कर पाना मुश्किल तो है, किन्तु असंभव नहीं | याद रखिये असीम सफलता के शिखर पर पहुँचने के लिए आपको औरों से थोडा अलग होना होगा, और ९९ प्रतिशत लोग अपने मन को काबू में करना नहीं जानते, और सदैव उसी के वश में रहते हैं. शायद इसिलए विश्व में सफलतम लोगों की सूची तो फिर भी लिखी जा सकती हैं, परन्तु असफल लोग अनगिनत हैं | [Read more…]

सफलता के तीन मुख्य बिंदु

आम तौर पर यह देखा गया है कि लोग सफलता प्राप्ति के लिए समुचित प्रयास करें ना करें, परन्तु यह भ्रम अवश्य पाल लेते हैं कि वह सफल होने के लिए कुछ भी कर सकते हैं | मेरा यह वाक्य हो सकता है कि एक पल के लिए आपको चौका दे, किन्तु यही सत्य है. हर किसी को सफलता पसंद है , लेकिन सफलता की सीढ़ियों को चढ़ने के लिए जो भी आवश्यक बिंदु हैं, हम प्रायः उनकी उपेक्षा कर देते है |

उदहारण के तौर पर यदि हमने यह निश्चय किया है कि, अगले तीन महीनों में हम अपना वजन कम करेंगे , तो हो सकता है की हम किसी gym कि सदस्यता ले लें , या हो सकता कि हम अपने घर कोई  महंगा ट्रेडमिल ले आयें , परन्तु अंततः हम ये ही पायेंगे की, gym की सदस्यता शुल्क देने के बाद भी, अथवा महँगी से महँगी ट्रेडमिल खरीदने के बाद भी , हम व्यायाम के लिए समय नहीं निकल पा रहे हैं. ऐसा इसलिए नहीं है की हम सफल नहीं होना चाहते , या हमें इस बात का ज्ञान नहीं है, कि सफल होने के लिए हमारा व्यायाम करना जरुरी है. ऐसा इसलिए है , की अन्दर ही अन्दर , हमारा मन हमें किसी चमत्कार की आशा करने के लिए उकसाता है, और हम चाहते हुए भी अपने सफ़लता के अभियान को कार्यान्वित नहीं कर पाते. हम इस आस में अपने काम को अगले दिन पर टाल देते हैं, की एक ना एक दिन परिस्थितियाँ अनुकूल होंगी और हम अपने अभियान में आगे बढ़ सकेंगे . यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है. और हम अपने जीवन के सबसे बहुमूल्य पल यूँ ही व्यर्थ गवां देते हैं. [Read more…]