तुम ही सच हो माता – जय माँ वैष्णो देवी

तुम ही सच हो माता, बाकि दुनिया झूठी |

जग रूठा मुझसे , पर तुम कभी ना रूठी ||

 

ऐसे ही कुछ भाव लेकर जब एक भक्त माता वैष्णो देवी के दरबार में जाता है, तो कहीं भी कोई भी शंका नहीं रह जाती, की माता उसकी प्रार्थना नहीं सुनेंगी | vaishno deviत्रिकुट पर्वत पर स्थित , कटरा के पास माता का यह दरबार सदियों से उनके अनन्य भक्तों की आस्था का केंद्र रहा है | एक समय था, जब माता तक पहुँचने की यात्रा अत्यंत ही दुर्गम थी, किन्तु जैसे जैसे समाया बीतता गया, माता के ही भक्तों ने इस मार्ग को अधिक  से अधिक सुगम बना दिया | आज ना केवल माता का दरबार, बल्कि कटरा में भी प्रत्येक वर्ष, दिन के बारह मॉस , भक्तों का ताँता लगा रहता है | इसमें कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी , अगर यह कहा जाये कि कटरा तथा उसके पास के सभी गाँवो का रोजगार एवं अर्थव्यवस्था माँ कि वजह से ही चल रही है |

एक समय था जब मै लगभग हर वर्ष ही माता के दर्शन को जाता था, परन्तु पिछले वर्ष जब मै एक लम्बे अन्तराल के बाद माँ के पास गया, तो भूल ही गया की मांगने क्या आया था , मानो दर्शन कर लेना ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य था जो अब पूरा हो गया है | यह सच है, की आप कितनी बार भी वहां जाओ, प्रत्येक बार आपको माता का दिव्य दर्शन सब कुछ भुला देगा | फिर सोचा मै कुछ मांगूंगा तो वो भी सीमित ही होगा, मै खुलकर भी मांगू तो शायद उतना ना मांग पाऊँ , जीतना कि माँ मुझे बिना मांगे ही दे देगी |

यात्रा का शुभारम्भ

जब अप्रैल के महीने में लखनऊ से यह यात्रा शुरू की , तो माता के दर्शन के अलावा एक लालच और मन में था , की चलो शायद लखनऊ की गर्मी से कुछ दिनों के लिए ही सही छुटकारा तो मिलेगा | लेकिन कटरा जाकर पता चला कि मौसम सुहावना तो था किन्तु ठंडा नहीं | बल्कि दिन में तो गर्मी ही थी | इस बार हमने समझदारी यह की, की यात्रा पर्ची इन्टरनेट से ही पंजीकृत करवा ली थी, इसीलिए यात्रा पर्ची कार्यालय की लम्बी कतार से भा गए| आप जब भी वैष्णो देवी की यात्रा से जायेंगे, आपको अपनी यात्रा का पहले से ही पंजीकरण कराना होता है| जो या तो आप कटरा पहुंचकर ही यात्रा पर्ची कार्यालय से करवा सकते हैं, जिसमे आपको एक लम्बी कतार एवं भरी भीड़ का सामना करना पड़ेगा| एक दूसरा विकल्प है, की आप इन्टरनेट के माध्यम से यात्रा पर्ची का अग्रोम भुगतान कर दे , और टिकट अपने साथ ले कर आयें | मुझे दूसरा विकल्प अच्छा लगा |

कटरा में ठहरने का स्थान :-

वैसे तो ऊपर भवन में भी रुकने की व्यवस्था है, किन्तु हमने कटरा के बीच बाज़ार में ही होटल बुक करा लिया था| इस जगह की खास बात यह थी, की होटल से निकलते ही आप अपने आपको एक बाज़ार के बीचोंबीच पते हैं, इसके साथ ही, पास ही में यात्रा पर्ची का कार्यालय, एवं बाण गंगा के लिए टैक्सी/ ऑटो स्टैंड भी है | बाण गंगा वह स्थान है जहाँ से माता के दरबार के लिए असल पदयात्रा शुरू होती है|

 

बाण गंगा :-

वैसे तो, यात्रा का आनंद इस स्थान से पैदल चलने पर ही है, लेकिन फिर भी – वृद्ध जनों के लिए या बच्चों के लिए बाण गंगा से घोडा, और पिट्टू भी उपलब्ध है| हमने यहाँ से पैदल यात्रा ही शुरू की| वातावरण में चारों तरफ माता के जयकारों की ही गूँज सुनाई दे रही थी | जिस किसी को देखो वो ही जयकारा लगाने की प्रतिस्पर्धा में शामिल हो रहा था | लेकिन इस प्रतिस्पर्धा में भी आनंद आ रहा था | माँ की लीला ही ऐसी है , जो चढ़ाई से डर रहे थे, और जिनको घर में पहले तल तक जाने में भी थकान होती थी, वो भी अपने अन्दर आश्र्चर्यजनक रूप से नयी उर्जा का संचार महसूस कर रहे थे|

नया रास्ता और विधुत स्वचालित गाड़ी :-

एक अच्छी बात इस बार देखने को मिली, अर्ध्कुमारी से पहले ही, जो की लगभग यात्रा के बीच में पड़ता है, एक और रास्ता सीधे भवन हो गया है, जो की अर्ध्कुमारी वाले रास्ते थोडा आसान है| इसीलिए नहीं की वह छोटा है, बल्कि इसीलिए की वहां चढ़ाई थोड़ी कम है | जहां पहले हमें अर्ध्कुमारी से आगे सांझी छत की तरफ एकदम खड़ी चढ़ाई का सामना करना पड़ता था, और उसके बाद भवन के लिए थोडा नीचे उतरना पड़ता था, वहीँ अब यह नया रास्ता हमें सीधे भवन की ओर ले जाता है |

इस रस्ते पर थोडा आगे जाते ही shrine board की ही तरफ से नया विश्राम स्थल बनाया गया है जिसका नाम है हिमकोटी | यहाँ ना केवल आप हल्का फुल्का नाश्ता कर सकते है, बल्कि सामने दिख रही भव्य पर्वत माला का आनंद भी ले सकते | यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य निसंदेह आपकी सारी थकान मिटा देगा |

भवन

जैसे जैसे माता का भवन निकट आ रहा था, हमारी थकान और भी कम होती जा रही थी | यह आश्चर्यजनक अनुभव था की मेरे इससे पहले भी अनेको बार माता के दरबार जाने के बावजूद , मन की उत्सुकता और कौतूहल में आज भी कोई कमी नहीं आयी थी | दूर से दिखाई देता भवन मन के उन्माद को और भी बढ़ा रहा था | और ऐसा लग रहा था की जल्दी से जल्दी हम माँ के पास पहुँच जाएँ | मेरी गोद में मेरा एक साल का बेटा प्रखर लगातार मुस्करा रहा था, शायद वो मेरी मन की बैचेनी समझ रहा था |

vaishno devi yatra

माता के दर्शन

आखिरकार हम भवन पहुँच गए | माता के दर्शन कर के जब प्रसाद ग्रहण किया तो मन को शांति मिली | चूंकि उस दिन भीड़ कुछ अधिक नहीं थी, इसीलिए दर्शन जल्दी हो गए और माँ की चौखट मैं समय भी पर्याप्त मिला|

लौटा तो देखा helicopter के counter पर लौटने का टिकट मिल रहा था | पर हम पैदल ही वापस उतरे| कुल मिलाकर यात्रा आनंदमयी रही | अगले दिन शाम की हमारी जम्मू से वापसी की train थी |

पूरी यात्रा में shrine board की वेबसाइट https://www.maavaishnodevi.org/ हमारे लिए बहुत मददगार साबित हुई, जिससे हमें यात्रा के सम्बन्ध में लगभग सारी सूचनाएं ही मिल गयी थी |

जय माता की ||

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